बामणगांव , टिहरी जनपद
स्वयं सहायता समूहों से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की नई पहल
उत्तराखंड के ग्रामीण अंचलों में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सराहनीय पहल देखने को मिल रही है। टिहरी जनपद के जौनपुर विकासखंड स्थित बामणगांव में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं अब गांव में ही प्राकृतिक संसाधनों से शैंपू, साबुन, हैंडवॉश और सर्फ जैसे दैनिक उपयोग के उत्पाद तैयार करेंगी। यह पहल न केवल ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि स्वरोजगार के नए अवसर पैदा कर पलायन रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
जौनपुर विकासखंड के बामणगांव में राधा रानी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अभिनव कदम बढ़ाया है। समूह की महिलाएं प्राकृतिक संसाधनों, विशेष रूप से स्थानीय वनस्पतियों और औषधीय टहनियों बिमल और रीठा का उपयोग कर शैंपू, साबुन, हैंडवॉश और सर्फ जैसे उत्पाद तैयार करेंगी। इस कार्य में उन्हें ग्रासरूट अवेयरनेस एंड टेक्निकल इंस्टीट्यूट ऑफ सोसायटी (गति) के शोधकर्ताओं एवं तकनीकी विशेषज्ञों का सहयोग प्राप्त हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रयोग सफल होता है, तो यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ स्थानीय महिलाओं को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराने में मील का पत्थर साबित होगा। इससे गांवों से होने वाले पलायन पर भी अंकुश लगाया जा सकेगा।
केंद्र और राज्य सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण के लिए ‘लखपति दीदी योजना’, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) तथा स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।
हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में इन योजनाओं का लाभ हर पात्र महिला तक समान रूप से नहीं पहुंच पा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, पारदर्शिता और नियमित प्रशिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि इनका वास्तविक लाभ गांव-गांव तक पहुंचे।
राधा रानी स्वयं सहायता समूह में अध्यक्ष नीलम उनियाल, कोषाध्यक्ष मधु थपलियाल, सचिव सरोज नौटियाल सहित ईमला देवी, मोनिका उनियाल, गुंजन नौटियाल, मुन्नी नौटियाल, रानी भारती, रंजीता उनियाल, जसो नौटियाल, कुसुम उनियाल, दीपिका थपलियाल, जामो देवी, अंशिका थपलियाल, किंद्रा देवी, रामपति देवी और गुलाबी देवी सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं।
इस पहल की एक सकारात्मक विशेषता यह भी है कि गांव के पुरुष सदस्य भी महिलाओं का पूरा सहयोग कर रहे हैं। इनमें गिरीश उनियाल, नितेश उनियाल , राजेश नौटियाल और संदीप थपलियाल प्रमुख रूप से शामिल हैं।
यह पहल इस बात का उदाहरण है कि यदि सरकारी योजनाओं, तकनीकी मार्गदर्शन और सामुदायिक सहभागिता का सही समन्वय हो, तो ग्रामीण महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बन सकती हैं बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन कर देश की अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे सकती हैं।
