मसूरी, उत्तराखंड।
पहाड़ों की रानी मसूरी में पर्यटन सीजन के दौरान बढ़ती यातायात समस्या और जाम से राहत दिलाने के उद्देश्य से शासन, प्रशासन और नगर पालिका परिषद मसूरी ने ई-रिक्शा सेवा शुरू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसी क्रम में किंक्रेग से शहर के विभिन्न मार्गों पर ई-रिक्शा का ट्रायल किया गया।
ट्रायल का निरीक्षण नगर पालिका परिषद मसूरी के अधिशासी अधिकारी गौरव भसीन तथा उप जिलाधिकारी राहुल आनंद ने स्वयं किया। ट्रायल के दौरान ई-रिक्शा को मसूरी के विभिन्न प्रमुख मार्गों और चढ़ाई वाले क्षेत्रों से गुजारा गया, ताकि यह परखा जा सके कि पहाड़ी क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों में यह वाहन कितनी प्रभावी ढंग से संचालित हो सकता है।
मसूरी की सड़कें कई स्थानों पर तीव्र चढ़ाई और उतराई वाली हैं, जहां वाहनों को रुक-रुककर चलना पड़ता है। ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बिना गियर वाले ई-रिक्शा इन मार्गों पर सुरक्षित और सुचारु रूप से चल पाने में कितने सक्षम साबित होते हैं।
अधिशासी अधिकारी गौरव भसीन ने बताया कि ई-रिक्शा का ट्रायल शहर के विभिन्न हिस्सों में किया जा रहा है, जिससे इसकी क्षमता और उपयोगिता का आकलन किया जा सके। उन्होंने कहा कि यदि ट्रायल सफल रहता है तो मसूरी में पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए यह एक सुविधाजनक एवं पर्यावरण अनुकूल परिवहन विकल्प बन सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व में संचालित की जा रही गोल्फ कार्ट सेवाओं के संबंध में परिवहन विभाग द्वारा लाइसेंस जारी नहीं किए जाते थे। ऐसे में बिना लाइसेंस किसी वाहन का सार्वजनिक सड़कों पर संचालन सुरक्षा और कानूनी दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता।
वहीं उप जिलाधिकारी राहुल आनंद ने बताया कि पूर्व में आयोजित विभिन्न बैठकों में पार्किंग व्यवस्था, जाम की समस्या के समाधान तथा शटल सेवा जैसी योजनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया था। इसी दिशा में ई-रिक्शा सेवा को एक व्यवहारिक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि ट्रायल सफल रहता है तो निकट भविष्य में मसूरी के प्रमुख मार्गों पर ई-रिक्शा आधारित शटल सेवा शुरू की जा सकती है। प्रस्तावित रूटों में शटल पार्किंग से माल रोड, माल रोड से कंपनी गार्डन, किंक्रेग से पिक्चर पैलेस तथा किताबघर तक के मार्ग शामिल हैं।
प्रशासन का मानना है कि ई-रिक्शा सेवा शुरू होने से न केवल यातायात दबाव कम होगा, बल्कि पर्यटकों को भी सुविधाजनक, किफायती और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन व्यवस्था उपलब्ध हो सकेगी।
वरिष्ठ संपादक
नितेश उनियाल
